राजनीति

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Devesh Khandelwal


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Posted On: 21 Jun, 2013  
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पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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के द्वारा:

कहते है की ‘‘प्रधान का चुनाव, प्रधानमंत्री के चुनाव से ज्‍यादा कठिन है.‘’ कहने को तो हम विश्व के सबसे बड़े लोकतन्त्र से संबंध रखते है, सोचिए अगर 121 करोड़ की जनसंख्या पर जनता के प्रतिनिधियों की संख्या बस 5000 के आसपास ही होती तो क्या होता. इसका मतलब था की विश्व की सबसे बड़ी जनसंख्या वाला देश, विश्व का सबसे कम प्रतिनिधियों वाला देश है। इसी फासले को मिटाने के लिए लोकतन्त्र की भावना को जनता के बीच पहुंचाने के लिए, भारत के संविधान के 73 वें संशोधन में ग्रामीण क्षेत्रों में त्रिस्तरीय पंचायती राज एवं स्थानीय प्रशासन की व्यवस्था के लिए पंचायती व्यवस्था को लागू किया गया. लेकिन ये सत्ता का विकेन्द्रीकरण कब सत्ता के दुरुपयोग में तब्दील हो गया, पता तक नहीं चला. मसलन बिहार देश का पहला राज्य है, जिसने पहल करते हुए महिलाओं के लिए पंचायतीराज व्यवस्था में 50 फीसदी आरक्षण लागू किया। सही कहा देवेश जी आपने ! असल में पंचायती राज व्यवस्था को जिस उद्देश्य से शुरू किया गया था वो उद्देश्य पूरा होता हुआ सा नहीं लग रहा ! सही और सटीक विषय पर सार्थक लेखन

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat




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